संपादकीय
भारतीय जीवन दर्शन में शब्द की शक्ति को ब्रह्म माना गया है। शब्दों की मर्यादा का निर्वहन किया जाना चाहिए। शब्दों की शुचिता और उनके सदुपयोग के प्रति सतर्क रहना चाहिए। ‘युवा औदीच्य’ ने अपने प्रकाशन के प्रथम अंक से ही शब्दों की गरिमा को बनाए रखने का पावन प्रयास किया है।
कलम का कौशल कागज पर अंकुरित शब्दों से प्रस्तुतिकरण होकर पाठक को आकर्षित करे, वही समाचार पत्र की सफलता की कहानी रचता है। वह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, नैतिक तथा पारिवारिक स्वरूप जैसे अनेक क्षेत्रों की समस्याओं को उद्घाटित करते हुए उनके समाधान का रास्ता भी अपने हृदय पटल पर सृजित करता है।
‘युवा औदीच्य’ मासिक पत्र चार वर्ष पूर्ण कर अब पांचवें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। ‘युवा औदीच्य’ मासिक पत्र ने स्वयं को उस समाज का प्रतिनिधि माना है जहाँ “सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा, स्नेह, संवेदना, सक्रियता, सजगता के संग होता जहाँ सबेरा”। ‘युवा औदीच्य’ ने अखिल भारतीय औदीच्य महासभा में हो रहे असंतुलन को भी संतुलित करने का प्रयास अपने माध्यम से किया है।
युवा औदीच्य कल्याण समिति ने भी ‘युवा औदीच्य’ के माध्यम से समाज की सेवा का संकल्प लेकर सक्रियता, सजगता, समन्वय और जन-सहयोग के साथ अपने प्रथम अंक से अभी तक निर्भीकता, साहस और सौहार्द के साथ समाज को जोड़े रखा है। ‘युवा औदीच्य’ ने जो भी देखा, आईने की तरह समाज के सामने रखा। अनसुलझी बातों को सुलझाने का प्रयास किया, जिसे समाज ने सराहा।
‘युवा औदीच्य’ को समाज के श्रेष्ठ लेखकों तथा पाठकों का भरपूर सहयोग मिला, जिसके कारण अच्छे विचारों को समाज के अंतिम सदस्य तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। इन्हीं विचारों के माध्यम से समाज के उन अनछुए पहलुओं को छुआ गया, जिन्हें समाज के सामने लाना आवश्यक था। समाज के नवोदित लेखकों ने भी ‘युवा औदीच्य’ के पथ को फरहाने में सहयोग दिया। उनके वैज्ञानिक विचारों ने समाज-जनों के दिल और दिमाग में गहरी पैठ बनाई।
अच्छे विचारों के माध्यम से समाज के सुधी पाठकों के बीच जगह बनाना एक बड़ी चुनौती होती है और इसी चुनौती को स्वीकार कर ‘युवा औदीच्य’ ने वरिष्ठजनों के अनुभवों से समाज को अवगत कराया। सभी पाठकों, युवाओं एवं मातृशक्ति से निवेदन है कि ‘युवा औदीच्य’ के अधिक से अधिक सदस्य बनाने का सतत प्रयास करें। आशा और विश्वास है कि ‘युवा औदीच्य’ को समाज का चहुँमुखी आशीर्वाद, स्नेह और दुलार मिलेगा।
‘युवा औदीच्य’ पत्र के पाँचवें वर्ष में प्रवेश करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
॥ जय गोविन्द माधव॥
– उद्धव जोशी, उज्जैन